उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता हुई 24 वर्षीय बबिता पांडे का छह दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP, सेना और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। युवती की रहस्यमयी गुमशुदगी ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, जबकि परिवार के लोग भी उत्तरकाशी में डेरा जमाए हुए हैं।
जानकारी के अनुसार नैनीताल निवासी बबिता पांडे 25 मई को अपने दो मित्रों हरमन पाल सिंह और हरमन प्रीत सिंह के साथ उधम सिंह नगर से उत्तरकाशी के लिए रवाना हुई थीं। 26 और 27 मई को तीनों ने हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के कई पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इसके बाद 28 मई को वे रेथल गांव पहुंचे, जहां उन्होंने रात बिताई। गांव में लगे CCTV कैमरों में बबिता अपने दोनों दोस्तों के साथ आखिरी बार दिखाई दी थीं।
29 मई को तीनों मित्रों ने रेथल से दयारा बुग्याल ट्रैक की शुरुआत की और रात में गोई (Goi) बेस कैंप पर रुके। आरोप है कि इसी रात बबिता संदिग्ध परिस्थितियों में अचानक लापता हो गई। घटना की सूचना प्रशासन को 30 मई को दी गई, जिसके बाद 31 मई से बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बबिता के दोनों दोस्तों के खिलाफ अपहरण से संबंधित धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस आपसी विवाद, दुर्घटना और अन्य संभावित आपराधिक पहलुओं समेत हर एंगल से जांच कर रही है। ट्रेकिंग गाइड और एजेंसी से जुड़े लोगों से भी पूछताछ जारी है।
बबिता की तलाश के लिए करीब 150 जवानों और अधिकारियों की टीम तैनात की गई है। सेना, ITBP, SDRF, NDRF, स्थानीय पुलिस, वन विभाग, SOG और आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मचारी घने जंगलों, गहरी खाइयों और कठिन ट्रैकिंग रूट्स पर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। ड्रोन कैमरों की मदद से भी इलाके की निगरानी की जा रही है।
पांच दिनों की लगातार खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर अब सर्च टीम का पूरा फोकस गोई बेस कैंप के पास स्थित एक रहस्यमयी झील पर है। SDRF और जल पुलिस की छह सदस्यीय विशेष डीप-डाइविंग टीम आधुनिक उपकरणों के साथ झील की गहराइयों की जांच कर रही है।
इस बीच जांच में एक बड़ा फर्जीवाड़ा भी सामने आया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी के.के. जोशी के अनुसार, पर्यटन विभाग के आधिकारिक ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पोर्टल पर बबिता और उसके साथियों का कोई वैध डिजिटल पंजीकरण नहीं मिला। जांच में पता चला कि संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी ने एक पुराने और एक्सपायर हो चुके परमिट का उपयोग करते हुए उस पर नए नाम चस्पा कर दिए थे।
QR कोड स्कैन करने पर पुराने ट्रेकर्स का रिकॉर्ड सामने आया, जिससे शुरुआती रेस्क्यू ऑपरेशन में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इस लापरवाही और कथित धोखाधड़ी को गंभीर मानते हुए पर्यटन विभाग ने संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फिलहाल युवती की तलाश और मामले की जांच लगातार जारी है।
