हरियाणा सरकार ने प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार का फोकस अब नई औद्योगिक नीतियों को जमीन पर उतारने और देश-विदेश के बड़े निवेशकों तक सीधे पहुंच बनाने पर है। अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से पहले कई बड़े शहरों में रोड शो और निवेशक बैठकें आयोजित की जाएंगी। सरकार की कोशिश केवल निवेशकों को नीतियों की जानकारी देने तक सीमित नहीं है। निवेशकों को जमीन, बेहतर बुनियादी ढांचा, तैयार औद्योगिक प्रोजेक्ट, सुविधाएं और समयबद्ध मंजूरी उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ वरिष्ठ अधिकारी लगातार रणनीति तैयार कर रहे हैं। हरियाणा सरकार ने ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति’ और ‘हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति-2026’ लागू की हैं। इन नीतियों के जरिए बड़े निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। मेक इन हरियाणा नीति के तहत करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य है। वहीं एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति के जरिए करीब 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश और 5 लाख रोजगार पैदा करने की योजना है। दोनों पहलों को मिलाकर सरकार ने करीब 10.55 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 15 लाख रोजगार के अवसरों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। अब सरकार इसी लक्ष्य को देश और विदेश के निवेशकों के सामने प्रमुखता से रखने की तैयारी में है।
नई नीतियों को लागू कराने में मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर की भूमिका अहम मानी जा रही है। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और नीतिगत फैसलों को तेजी से लागू कराने पर सरकार का विशेष जोर है। वहीं उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के स्तर पर निवेशकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और प्रोत्साहनों को जमीन पर लागू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सरकार का लक्ष्य निवेश प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है। कोशिश की जा रही है कि निवेशकों को आवेदन से लेकर मंजूरी और प्रोत्साहन मिलने तक की प्रक्रिया में कम से कम परेशानी हो। एमएसएमई और निर्यात नीति में आर्थिक तथा सुविधाओं से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। निवेश जुटाने के अभियान का पहला बड़ा पड़ाव मुंबई होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 23 से 25 अगस्त तक मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख लोगों और संभावित निवेशकों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान रोड शो, निवेशक बैठकें, प्लानरी सेशन और वन-टू-वन बातचीत के जरिए हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं को सामने रखा जाएगा। मुंबई के बाद सरकार की नजर बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों पर है। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, फार्मा, स्टार्टअप और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश होगी। सरकार इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों को हरियाणा में निवेश के लिए आमंत्रित करने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा की निवेश रणनीति केवल घरेलू कंपनियों तक सीमित नहीं रहने वाली है। सरकार विदेशों में भी निवेशक रोड शो और बिजनेस मीटिंग आयोजित करने की तैयारी कर रही है। ऐसे देशों और कंपनियों की पहचान की जा रही है, जहां से हरियाणा में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावना है। बड़े उद्योगों के साथ सरकार का फोकस एमएसएमई सेक्टर पर भी है। छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूत करके रोजगार, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार का मानना है कि मजबूत एमएसएमई सेक्टर बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन को भी मजबूती दे सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ा सकता है। स्टार्टअप और महिला उद्यमिता को भी इस रणनीति में जगह दी गई है। सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और आर्थिक सहायता व सब्सिडी के माध्यम से नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इससे निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अप्रैल 2027 में होने वाला ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ करीब 11 साल बाद राज्य में बड़े स्तर पर ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की वापसी होगी। इससे पहले होने वाले रोड शो को सरकार निवेशकों का भरोसा जीतने और बड़े प्रोजेक्ट हरियाणा तक लाने की अहम कड़ी मान रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन बड़े निवेश लक्ष्यों को वास्तविक प्रोजेक्ट में बदलने की होगी। निवेशकों से समझौते करने के बाद उन्हें जमीन पर उतारना, समयबद्ध मंजूरी देना और रोजगार के वास्तविक अवसर पैदा करना सरकार के लिए अहम परीक्षा होगी। मुंबई से शुरू होने वाला अभियान इसी दिशा में हरियाणा सरकार की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
