पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बेअदबी कानून को लेकर सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस के विधायकों ने रोष प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस ने अपने काम रोको प्रस्तावों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इस दौरान स्पीकर ने कहा कि कांग्रेस विधायकों द्वारा दिए गए प्रस्ताव स्वीकार किए जाते हैं और नियमानुसार उन पर चर्चा कराई जाएगी। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बेअदबी कानून लाने से पहले सिख धार्मिक संस्थाओं और संबंधित पक्षों को विश्वास में नहीं लिया गया। उनका आरोप था कि सरकार की कार्यशैली श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और भावनाओं के खिलाफ है। इस पर सदन का माहौल और अधिक गर्म हो गया। स्पीकर ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने की हिम्मत किसी में नहीं है और इस प्रकार की टिप्पणी से बचना चाहिए।
इसके बाद कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि अतीत में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अवहेलना पूर्व सरकार के समय हुई थी। उनके इस बयान पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। देखते ही देखते कांग्रेस और अकाली दल के विधायक सदन के बीच पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। दोनों दलों के विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। जवाब में आम आदमी पार्टी के विधायक भी अपनी सीटों से उठकर विरोध में उतर आए। सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक से सदन में काफी देर तक शोरगुल का माहौल बना रहा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों पर अतीत में पंजाब के हजारों युवाओं की मौतों के आरोप लगते रहे, वही आज धार्मिक मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले भी श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सम्मान नहीं किया और अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उछाला जा रहा है। लगातार बढ़ते हंगामे और नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। स्थगन के दौरान भी सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद सदन में नकली खाद का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने आरोप लगाया कि खाद के नमूने फेल होने पर छोटे दुकानदारों के खिलाफ तो कार्रवाई होती है, लेकिन बड़ी कंपनियों पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते। उन्होंने सरकार से पूछा कि अब तक कितनी बड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस पर कृषि मंत्री गुरमीत सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार नकली खाद और कृषि उत्पादों के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करती। उन्होंने बताया कि जांच के बाद दो बड़ी कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं तथा उन्हें नोटिस भी जारी किए गए हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
