नीट (NEET) परीक्षा में शामिल हुए छह छात्रों ने अपनी ओएमआर (OMR) शीट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने जिन उत्तरों को अपनी ओएमआर शीट पर भरा था, वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा अपलोड की गई स्कैन कॉपी में अलग दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि इस कथित अंतर का सीधा असर उनके प्राप्त अंकों और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की संभावना पर पड़ सकता है। मंगलवार को मामले का उल्लेख भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया। छात्रों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि चूंकि नीट काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी है, इसलिए मामले की जल्द सुनवाई की जाए ताकि छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। अदालत ने कहा कि मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे छात्रों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद जगी है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल छह छात्रों से संबंधित है और सभी ने परीक्षा में 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि यदि ओएमआर शीट में कथित त्रुटियों को ठीक नहीं किया गया तो इन छात्रों की रैंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की संभावना गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों ने समस्या के समाधान के लिए कई बार एनटीए से संपर्क किया। उन्होंने ईमेल भेजे, कार्यालय जाकर अधिकारियों से मुलाकात की और अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। याचिका में दावा किया गया है कि छात्रों को अंततः अदालत का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले से ही नीट परीक्षा प्रणाली और 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया में सुधार से जुड़े मामलों पर विचार कर रहा है। एनटीए ने पहले उम्मीदवारों को उनकी स्कैन की गई ओएमआर शीट उपलब्ध कराई थी और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया था। हाल के दिनों में बॉम्बे हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में भी नीट परिणाम और स्कोर से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं।
