पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि समान पदों पर कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पंजाब के कर्मचारियों को वर्तमान में 30 से 70 प्रतिशत तक अधिक वेतन मिल रहा है। सरकार के अनुसार, यह अंतर महंगाई भत्ते (डीए) की वजह से नहीं बल्कि राज्य के उच्च पे-स्केल के कारण है, जिससे कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन केंद्र सरकार के कर्मचारियों से अधिक बनता है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि पंजाब सरकार 42 प्रतिशत डीए का भुगतान कर रही है। इसके बावजूद पंजाब के कर्मचारियों का कुल वेतन अधिक है क्योंकि उनका मूल वेतन (बेसिक पे) केंद्र सरकार के समान पदों की तुलना में ज्यादा निर्धारित किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पंजाब की वेतन संरचना और केंद्र सरकार की वेतन व्यवस्था अलग-अलग हैं। ऐसे में केवल केंद्र के समान 60 प्रतिशत डीए लागू करना व्यावहारिक नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है तो राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और मौजूदा वेतन ढांचे का संतुलन भी प्रभावित होगा। प्रवक्ता ने कहा कि यदि भविष्य में पंजाब में केंद्रीय वेतनमान लागू किया जाता है तो सरकार केंद्रीय महंगाई भत्ता देने के लिए भी तैयार है। हालांकि यह तभी संभव होगा जब पूरी वेतन संरचना केंद्र सरकार के अनुरूप बनाई जाए, ताकि किसी भी कर्मचारी का वेतन केंद्र सरकार के समान पद पर कार्यरत कर्मचारी से कम न रहे।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पंजाब में क्लर्क और हवलदार को 54,812 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है, जो केंद्र सरकार के समान पद की तुलना में 17,852 रुपये अधिक है। स्टेनोग्राफर को 56,374 रुपये वेतन मिलता है, जो केंद्र के मुकाबले 9,014 रुपये ज्यादा है। इसी तरह ड्राइवर को 40,612 रुपये वेतन मिल रहा है, जो केंद्र से 3,652 रुपये अधिक है। वहीं ईटीटी शिक्षक को 67,592 रुपये वेतन मिलता है, जो केंद्र सरकार के समान पद से 1,832 रुपये ज्यादा बताया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा पहले से ही कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च हो रहा है। ऐसे में वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि बिना वेतन संरचना में बदलाव किए केवल केंद्रीय डीए लागू किया जाता है तो इससे राज्य के खजाने पर भारी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध बजट भी प्रभावित हो सकता है।
