बरनाला में आयोजित कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता बैठक के दौरान हलका बरनाला के विधायक और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह काला ढिल्लों का संबोधन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन अपने भाषण में काला ढिल्लों ने बिना किसी नेता का नाम लिए पार्टी के भीतर हो रही दखलअंदाजी और कुछ नेताओं की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। काला ढिल्लों ने कहा कि यदि पार्टी ने उन पर और उनके कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा जताया होता तो केवल बरनाला ही नहीं, बल्कि आसपास की कई विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को बरनाला में कांग्रेस की जीत पसंद नहीं आई और इसी वजह से जिले के राजनीतिक मामलों में लगातार अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सम्मान, अनुशासन और शालीनता की राजनीति की है। उनका प्रयास रहा है कि पार्टी का हर नेता सम्मान के साथ काम करे और संगठन मजबूत बने। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई उनकी विनम्रता को कमजोरी समझता है तो यह उसकी गलतफहमी है। उन्होंने संकेतों में कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, उन्हें कमजोर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।
काला ढिल्लों ने भावुक अंदाज में अपने कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत न धन है और न ही किसी बड़े नेता का संरक्षण, बल्कि उनके समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कार्यकर्ता उनके साथ खड़े हैं, तब तक कोई भी उन्हें राजनीतिक रूप से दबा नहीं सकता। उनके इस बयान पर सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियां बजाईं और समर्थन में नारे भी लगाए। उन्होंने वर्ष 2024 के बरनाला विधानसभा उपचुनाव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम थी। उन्होंने कहा कि उसी मेहनत के दम पर कांग्रेस उस उपचुनाव में पूरे पंजाब में अपनी एकमात्र सीट जीतने में सफल रही। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए वह मजबूती से खड़े रहेंगे।
काला ढिल्लों के इस भाषण के बाद पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व को लेकर असंतोष की अटकलों को और हवा दी है। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को बदलते राजनीतिक समीकरणों और संगठन के भीतर शक्ति संतुलन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि हाल के दिनों में जिला स्तर के कुछ नेताओं को प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियां दिए जाने और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष की चर्चाएं पहले से चल रही थीं। ऐसे में काला ढिल्लों का यह सार्वजनिक बयान आने वाले समय में पंजाब कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक फैसलों पर असर डाल सकता है। अब राजनीतिक हलकों की नजर पार्टी हाईकमान की प्रतिक्रिया और आगामी बैठकों पर टिकी हुई है।
