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देहरादून:- उत्तराखंड में वर्ष 2024 में शुरू हुई सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया करीब दो साल बाद भी विवादों में घिरी हुई है। 1500 से अधिक पदों के लिए शुरू की गई इस भर्ती में लिखित परीक्षा के बाद वर्ष 2025 में 1352 अभ्यर्थियों की अंतिम मेरिट सूची जारी की गई थी। हालांकि, भर्ती से जुड़ा मौजूदा विवाद चयनित अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर नहीं, बल्कि परीक्षा में पूछे गए तीन सवालों के अंकों में संशोधन को लेकर है। इन तीन प्रश्नों को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। मामला न्यायालय तक पहुंचा और हाईकोर्ट ने भी इन प्रश्नों को लेकर उठाई गई आपत्तियों को सही माना। इसके बाद इन्हीं तीन प्रश्नों के अंक पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए बड़ा मुद्दा बन गए।
तीन सवालों के अंकों से बदला पूरा समीकरण
सहायक अध्यापक भर्ती के लिए वर्ष 2024 में विज्ञप्ति जारी की गई थी। इसके बाद फरवरी 2025 में लिखित परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा के परिणाम और मेरिट के आधार पर आयोग ने 1352 अभ्यर्थियों का चयन किया। बाद में कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में पूछे गए तीन प्रश्नों को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इन प्रश्नों में समस्या होने के कारण परीक्षा परिणाम और मेरिट पर इसका सीधा असर पड़ा है। अभ्यर्थियों ने मांग की कि यदि इन तीन प्रश्नों के अंकों में बदलाव किया जाता है तो उसका प्रभाव केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरी मेरिट सूची को दोबारा तैयार किया जाए। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद विवाद और गंभीर हो गया। कोर्ट के स्तर पर भी इन तीन प्रश्नों से जुड़ी आपत्तियों को सही पाए जाने के बाद आयोग के सामने संशोधित अंकों और चयन प्रक्रिया को लेकर नई स्थिति पैदा हुई।
आयोग ने 1352 चयनित अभ्यर्थियों की सूची रखी बरकरार
मामले में आयोग ने पहले से चयनित 1352 अभ्यर्थियों की सूची को यथावत रखने का निर्णय लिया। वहीं, तीन विवादित प्रश्नों के अंकों में संशोधन के बाद उन अभ्यर्थियों को भी चयन का अवसर देने का फैसला किया गया, जो संशोधित अंकों के आधार पर अंतिम कटऑफ के दायरे में आ रहे थे। इसी प्रक्रिया के तहत करीब 104 अतिरिक्त अभ्यर्थियों का चयन किया गया और उनकी सूची जारी की गई।
यहीं से अभ्यर्थियों का विरोध शुरू हो गया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि तीन प्रश्नों के अंक संशोधित किए गए हैं तो इसका प्रभाव पूरी मेरिट सूची पर पड़ना चाहिए था। उनके अनुसार केवल अतिरिक्त अभ्यर्थियों को चयनित करने के बजाय पहले से चयनित 1352 अभ्यर्थियों समेत पूरी मेरिट को संशोधित किया जाना चाहिए।
कटऑफ को लेकर सबसे बड़ा विवाद
अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने संशोधित अंकों को ध्यान में रखते हुए पहले से चयनित अंतिम अभ्यर्थी के प्राप्त अंकों को आधार बनाकर नई कटऑफ तय कर दी। इसी कटऑफ के आधार पर लगभग 104 अन्य अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। लेकिन आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी इस व्यवस्था से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि तीन प्रश्नों के अंक संशोधित होने से पहले फरवरी 2025 में जो अंतिम कटऑफ निर्धारित की गई थी, उसी कटऑफ को आधार मानकर संशोधित मेरिट सूची तैयार की जानी चाहिए। अभ्यर्थियों का दावा है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण ऐसे उम्मीदवार भी चयन से बाहर हो रहे हैं, जिनके संशोधित अंक पहले जारी की गई अंतिम कटऑफ से अधिक हैं।
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, अगली तारीख मंगलवार को
मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया का कहना है कि न्यायालय की ओर से जो भी निर्देश दिए जाएंगे, आयोग उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी और कोर्ट के आदेश के बाद ही इस मामले में अगला कदम तय होगा। अब मामले में आगामी मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। इस दौरान आयोग को फरवरी 2025 में निर्धारित अंतिम कटऑफ के आधार पर अभ्यर्थियों की सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी है।
सड़क पर उतरे अभ्यर्थी, संशोधित मेरिट जारी करने की मांग
मामले को लेकर प्रभावित अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अभ्यर्थियों ने आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपनी मांग दोहराई है कि तीन विवादित प्रश्नों के अंकों में संशोधन का लाभ पूरी भर्ती प्रक्रिया में समान रूप से दिया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले से चयनित 1352 उम्मीदवारों को सूची में बनाए रखते हुए अलग से करीब 104 अभ्यर्थियों को चयनित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि संशोधित अंकों के आधार पर पूरी मेरिट सूची नए सिरे से तैयार होनी चाहिए। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक, यदि तीन प्रश्नों के अंक संशोधित किए गए हैं तो इसका असर हर उम्मीदवार के स्कोर पर पड़ता है। ऐसे में पूरी मेरिट को दोबारा तैयार करना ही पारदर्शी तरीका होगा।
अभ्यर्थियों को अपने भविष्य की चिंता
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पहले ही लंबी हो चुकी है और अब अंक संशोधन के कारण कई उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। उनका आरोप है कि संशोधित अंकों के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों को चयन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनकी मांग है कि आयोग पूरे मामले पर दोबारा विचार करे और न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए ऐसी संशोधित मेरिट सूची जारी करे, जिसमें सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। फिलहाल इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। आगामी सुनवाई में आयोग की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली सूची और अदालत के निर्देश इस भर्ती प्रक्रिया की आगे की दिशा तय कर सकते हैं। यानी सहायक अध्यापक भर्ती का विवाद अब सिर्फ तीन सवालों के अंकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे पूरी मेरिट, कटऑफ और चयन प्रक्रिया प्रभावित होने का सवाल खड़ा हो गया है। अब अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
