देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर गुजरात के वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और सनातन परंपराओं से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय संस्कृति, आस्था और इतिहास से जुड़ने का ऐसा अभियान है, जो देश की नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने भगवान सोमनाथ और बाबा केदार से सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सफल यात्रा की प्रार्थना की।
700 श्रद्धालु बने विशेष तीर्थ यात्रा के सहभागी
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि इस छह दिवसीय विशेष तीर्थ यात्रा में प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 700 श्रद्धालु शामिल हुए हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएं, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत-महात्मा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तराखंड संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की यात्राएं समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
सोमनाथ भारत के आत्मविश्वास और पुनर्जागरण का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की अदम्य आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार आक्रमणों और विध्वंस का सामना करने के बावजूद सोमनाथ मंदिर हर बार नए स्वरूप में स्थापित हुआ और पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति कभी समाप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और भारतीय सभ्यता के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण का अभूतपूर्व कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ धाम, महाकाल लोक, बद्रीनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर सहित देश के अनेक प्रमुख तीर्थस्थलों का व्यापक विकास और पुनरुद्धार किया गया है। इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय एकता के केंद्र हैं।
देवभूमि उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने बताया कि सरकार केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार पर भी तेजी से काम कर रही है। इसके अलावा हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन के गहन अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है। सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सरकार की पहल
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई है ताकि सभी नागरिकों को समान न्याय और समान अधिकार मिल सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि अवैध अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है। सरकार का मानना है कि यह केवल भूमि संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक विरासत की रक्षा का प्रयास भी है।
शिक्षा सुधारों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया है तथा उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है ताकि शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके। आधुनिक विकास और सनातन संस्कृति साथ-साथ
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां आधुनिक विकास, पर्यटन, आधारभूत सुविधाएं और सनातन संस्कृति समान गति से आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता के सहयोग से उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
