पौड़ी गढ़वाल:- विकासखंड पौड़ी में ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद गहरा गया है। बीते शुक्रवार को एक नए ग्राम प्रधान संगठन के गठन और अध्यक्ष के चयन के दावे के बाद मामला जिलाधिकारी तक पहुंच गया। मौजूदा ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष हरिमोहन जुयाल समेत कई ग्राम प्रधानों ने सोमवार को जिलाधिकारी पौड़ी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। ग्राम प्रधानों का आरोप है कि कुछ ग्राम प्रधानों को विश्वास में लिए बिना एक अलग संगठन का गठन कर अध्यक्ष चुन लिया गया। शिकायत में ग्राम प्रधानों के नाम, हस्ताक्षर और मुहरों के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है।
हस्ताक्षर और मुहरों के कथित दुरुपयोग का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शुक्रवार को एक ग्राम प्रधान ने कुछ अन्य प्रधानों के साथ मिलकर ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष का चुनाव किए जाने का दावा किया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी। ग्राम प्रधानों ने बताया कि एक दस्तावेज में करीब 38 हस्ताक्षर दर्ज हैं, जबकि इनमें से सिर्फ 27 स्थानों पर मुहर लगी हुई है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कई मुहरें स्पष्ट नहीं हैं। वहीं एक ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दावा किया कि उनकी मुहर और हस्ताक्षर का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया है। ग्राम प्रधान संगठन के प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हरिमोहन जुयाल ने बताई अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष हरिमोहन जुयाल का कहना है कि संगठन के चुनाव दिसंबर 2025 में हुए थे। उनके मुताबिक, अध्यक्ष पद के लिए चार ग्राम प्रधानों ने चुनाव लड़ा था और कुल 58 मतों में से उन्हें सर्वाधिक 24 वोट मिले थे। इसके आधार पर उन्हें ग्राम प्रधान संगठन पौड़ी का अध्यक्ष चुना गया था। हरिमोहन जुयाल के अनुसार, इसके बाद उन्हें प्रदेश स्तर पर संगठन में सचिव की जिम्मेदारी भी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि शुक्रवार को उन्हें जानकारी मिली कि ग्राम प्रधान शंकर नौटियाल ने मनरेगा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के नाम पर कुछ ग्राम प्रधानों से हस्ताक्षर करवाए थे। जुयाल का दावा है कि बाद में उन्हीं हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर शंकर नौटियाल ने खुद को ग्राम प्रधान संगठन का ब्लॉक अध्यक्ष घोषित कर दिया।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया अपनाने की मांग
हरिमोहन जुयाल ने कहा कि यदि ग्राम प्रधान उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं तो उन्हें नियमानुसार प्रस्ताव लाना चाहिए। इसके बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए और जिस प्रत्याशी को बहुमत मिले, उसे अध्यक्ष चुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ग्राम प्रधानों से पूरी जानकारी दिए बिना कथित तौर पर खाली कागजों पर हस्ताक्षर और मुहर लगवाई गई और बाद में उनका इस्तेमाल किया गया।
डीएम ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही
मामले को लेकर हरिमोहन जुयाल और अन्य ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी पौड़ी से मुलाकात की। उन्होंने कथित रूप से दुरुपयोग किए गए हस्ताक्षर और मुहरों के नमूने भी जांच के लिए उपलब्ध कराए हैं। जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO), पौड़ी को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि संगठन के गठन और चुनाव की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
