मकर संक्रान्ति जिसे खिचड़ी कहते है। ऐसे में मकर संक्रांति पुण्यकाल सोमवार को मनाया जाएगा। मेषा आदि 12 राशियों में सूर्य के परिवर्तन काल को संक्रान्ति कहा जाता है। अतः किसी भी संक्रान्ति के समय स्नान, दान, जप, यज्ञ का विशेष महत्व है। पृथ्वी के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रान्ति कहते है। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा कि ओर जाना उत्तरायण तथा कर्क रेखा से दक्षिणी रेखा की ओर जाना दक्षिणायन कहते है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं। प्रकाश बढ़ जाता है। रातें दिन की अपेक्षा छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायन में इसके ठीक विपरीत होता है।
मकर संक्रान्ति पुण्यकाल इस वर्ष पौष शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रातः 9.29 के बाद पंचमी तिथि सोमवार को पूरे दिन भोग करेगी। 15 जनवरी दिन सोमवार को शतभिषा नक्षत्र व अमृत नामक योग है। सोमवार को प्रातः 8.42 बजे पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अतः बताया कि उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है
