फिरोजपुर के गोल्डन इंक्लेव में 55 वर्षीय गुरकृपाल सिंह चावला की गोली लगने से मौत का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, सोमवार सुबह उन्होंने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। सूचना मिलते ही थाना सिटी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। परिजनों के मुताबिक, गुरकृपाल सिंह की बगदादी गेट के बाहर बाइक के स्पेयर पार्ट्स की दुकान थी। परिवार ने बताया कि घर में किसी तरह का विवाद नहीं था और घटना से पहले सब कुछ सामान्य चल रहा था। परिजनों ने पुलिस को बताया कि गुरकृपाल सिंह मानसिक रूप से परेशान रहते थे और उनका इलाज चल रहा था। वह नियमित रूप से दवाइयां भी लेते थे। पुलिस अब घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।
पुलिस ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने के साथ जांच आगे बढ़ा दी है। फिलहाल घटना के पीछे की वजह को लेकर पुलिस की जांच जारी है और पोस्टमार्टम तथा अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं, भोपाल में शादी के महज पांच महीने बाद 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में CBI ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। CBI ने दोनों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और ट्विशा को कथित तौर पर मानसिक व वैवाहिक क्रूरता का सामना कराने के आरोपों से जुड़े प्रावधान लगाए हैं। ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल में अपने पति के घर मृत मिली थीं। उनकी शादी को उस समय करीब पांच महीने ही हुए थे। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रभावशाली होने के कारण सबूतों को प्रभावित करने या मिटाने की कोशिश की गई।
CBI की चार्जशीट करीब 636 पन्नों की बताई जा रही है। इसमें दहेज मृत्यु, वैवाहिक क्रूरता, आत्महत्या के लिए उकसाने और साझा आपराधिक कृत्य से संबंधित कानूनी धाराओं को शामिल किया गया है। मामले की जांच में CBI ने आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल संपर्कों और घटना के समय उसकी गतिविधियों से जुड़े तथ्यों का भी विश्लेषण किया। FIR दर्ज होने के बाद समर्थ सिंह कुछ समय तक पुलिस के सामने नहीं आए थे। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और उन्हें 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। बाद में मामले की जांच CBI को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने भी उनसे पूछताछ की। मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भी CBI जांच की सिफारिश की थी। CBI ने जांच के दौरान घटनाक्रम से जुड़े मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को जांच का हिस्सा बनाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जांच का अहम हिस्सा रही। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार, ट्विशा के शरीर पर छह चोटों का उल्लेख किया गया था, जबकि मौत का कारण फांसी बताया गया था। शरीर पर मौजूद चोटों को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद मेडिकल और फोरेंसिक जांच को आगे बढ़ाया गया। ट्विशा के परिवार की मांग पर दूसरा पोस्टमार्टम भी कराया गया। जांच के दौरान जिमनास्टिक्स बेल्ट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। बाद में इसे बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। CBI यह जांच कर रही थी कि आरोपी की ओर से बताए गए घटनाक्रम के मुताबिक शव को फंदे से नीचे उतारना और बेल्ट खोलना वास्तव में संभव था या नहीं। इसी पहलू की जांच के लिए CBI ने ससुराल में क्राइम सीन को रीक्रिएट भी किया। एजेंसी ने घटनास्थल की परिस्थितियों को दोबारा समझने और आरोपी के बयान में बताए गए घटनाक्रम की व्यवहारिकता की जांच करने का प्रयास किया।
ट्विशा की मौत के तीन दिन बाद मामले में शुरुआती FIR दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं 3 और 4 लगाई गई थीं। CBI की चार्जशीट में BNS की धारा 108 भी शामिल की गई है, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। अब CBI की चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। दोनों मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी नजर रहेगी।
