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देहरादून:- साइबर ठगी के मामलों में कुछ मिनट की देरी भी पीड़ित को लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। ऐसे में शिकायत मिलते ही ठगी की रकम को रोकना, संदिग्ध बैंक खातों पर कार्रवाई करना और दूसरे राज्यों की पुलिस से तत्काल समन्वय बेहद अहम होता है। इसी दिशा में प्रभावी कार्रवाई के चलते उत्तराखंड पुलिस ने साइबर अपराध प्रबंधन के मामले में देश के टॉप-5 राज्यों में जगह बनाई है।
PMO की प्रगति समीक्षा में हुआ राज्यों के प्रदर्शन का आकलन
छह अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की प्रगति समीक्षा के दौरान 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक राज्यों में साइबर अपराध प्रबंधन की स्थिति का आकलन किया गया। इस समीक्षा में उत्तराखंड पुलिस का प्रदर्शन बेहतर रहा। साइबर ठगी की रकम को समय रहते रोकने, संदिग्ध बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई करने, शिकायतों के निस्तारण और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर जांच आगे बढ़ाने में उत्तराखंड पुलिस ने प्रभावी काम किया।
शिकायत मिलते ही रकम रोकने पर जोर
साइबर फ्रॉड होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण है कि पीड़ित बिना समय गंवाए इसकी सूचना पुलिस को दे। इसी उद्देश्य से उत्तराखंड में 1930 साइबर हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस संबंधित बैंकों के साथ समन्वय कर ठगी की रकम को आगे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर होने से रोकने का प्रयास करती है। यदि रकम समय रहते होल्ड हो जाती है, तो उसे पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाती है।
देरी बढ़ने के साथ रकम वापस मिलने की संभावना घटती है
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी के बाद शिकायत करने में जितनी अधिक देरी होगी, ठगी की रकम को ट्रेस कर रोकना उतना ही मुश्किल हो सकता है। इसलिए किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी होने पर पीड़ित को तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाती है। उत्तराखंड पुलिस की यह उपलब्धि साइबर अपराध से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई, बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय और अंतरराज्यीय पुलिस सहयोग की अहमियत को भी सामने लाती है।
