देहरादून:- प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी पुल के एप्रोच मार्ग के धंसने के मामले में धामी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने लोक निर्माण विभाग के तीन अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। जांच में पुल के डिजाइन और निर्माण से जुड़े स्तरों पर लापरवाही सामने आने की बात कही गई है। दरअसल, देहरादून के प्रेमनगर इलाके में नंदा की चौकी पुल का एप्रोच मार्ग भारी बारिश के बाद धंस गया था। सड़क पर बड़ा गड्ढा बनने के कारण पुल पर आवाजाही प्रभावित हुई। खास बात यह रही कि करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस पुल को यातायात के लिए खोले जाने के महज 16 दिन बाद ही एप्रोच मार्ग धंस गया। इसके बाद पुल की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े हुए थे।
तीन दिन में मांगी गई थी जांच रिपोर्ट
घटना सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। शासन की ओर से अधिकारियों से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। शुक्रवार शाम जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबित किए गए अधिकारियों में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, देहरादून से जुड़े तीन अभियंता शामिल हैं।
इन तीन अभियंताओं पर हुई कार्रवाई
शासन की कार्रवाई के तहत निम्न अधिकारियों को निलंबित किया गया है—
- राजेश कुमार — अधिशासी अभियंता (Executive Engineer), प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून।
- अमित त्यागी — सहायक अभियंता (Assistant Engineer), प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून।
- नवीन गैरोला — कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer), प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून।
जांच में डिजाइन से जुड़ी कमियां भी सामने आईं
जांच रिपोर्ट में पुल के एप्रोच मार्ग के धंसने के पीछे कई स्तरों पर लापरवाही की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुल के डिजाइन कंसलटेंट की ओर से भी जरूरी पहलुओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नदी के संभावित मार्ग परिवर्तन का अध्ययन किए बिना डिजाइन तैयार किया गया। इसके अलावा नदी के घुमावदार स्वभाव और नदी के ढलान को भी डिजाइन तैयार करते समय पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया।
नदी का बहाव एक ही स्पैन की ओर हुआ केंद्रित
जांच के अनुसार डिजाइन में मौजूद इन कमियों के चलते नदी का पूरा बहाव पुल के एक ही हिस्से यानी स्पैन (Span) की ओर केंद्रित हो गया। इसके परिणामस्वरूप पुल के किनारे वाले हिस्से यानी एबटमेंट के अपस्ट्रीम (Abutment Upstream) क्षेत्र में तेज कटाव हुआ। इस भारी कटाव की वजह से एप्रोच रोड के नीचे खाली जगह यानी कैविटी (Cavity) बन गई। धीरे-धीरे सड़क का यह हिस्सा कमजोर हुआ और आखिरकार एप्रोच मार्ग धंस गया।
इंजीनियरों की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, डिजाइन में मौजूद कमियों को समय रहते पहचानना और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना संबंधित इंजीनियरों की जिम्मेदारी थी। रिपोर्ट में अभियंताओं की ओर से अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरते जाने की बात सामने आई है। अब शासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। महज 16 दिन में करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल के एप्रोच मार्ग के धंसने के बाद हुई इस कार्रवाई को सरकार की ओर से जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
